Skip to main content

21वीं सदी का बीमार इंसान


जो इंसानियत को तड़पते देखकर भी, मुंह फेर लेता है,,
उस पर मेरे दोस्त, किसी दावा का असर कहाँ होता है..!!

ऐसे इंसानों के लिए बस यही कहना चाहूँगा मित्रों,,
कि,

"दूसरों के ग़मों को देखकर, जो मंद-मंद मुस्काता है,,
कुछ न कुछ रोज़.. उसके जिस्म में मर जाता है..
इतनी हैवानियत भर ली है, उसने अपने अन्दर,,

के अब आइना भी उसे देखता है, तो डर जाता है..!!" #VicharonKiUdan By-Doc Ravi

Comments

Post a Comment

Popular posts from this blog

रूठ गयी फिर मोहब्बत

रूठ गयी फिर मोहब्बत मुझसे, मेरी तन्हाई भी खफा हो गयी,, न जाने किस गुनाह ने, बनाया फिर गुनहगार मुझे, मेरी चाहत फिर बे-वफ़ा हो गयी..!! फिर दूर हो गयीं सब चाहतें मुझसे, उनकी बातें भी अब जुदा हो गयीं,, मेरी खताओं कि सज़ा मुझको दी, पर तेरी खताएं तो अदा हो गयीं..!!

एक पहेली... (तीन देवियाँ मेरे TL की)

टोरंटो में रहने वाली,, शायरी में सब कहने वाली... सांई का साथ कभी न छोड़े, हँस कर सब से रिश्ता जोड़े.. जीवन जिसका है सादा,, वो है कौन..""मैडम अनुराधा" कनेडियन छोरी गोरी गोरी, पर लागे है सिस्टर मोरी.. DP के सब कायल हैं, ट्विट्टर पर कई घायल हैं.. नाम है उसका very simple वो है कौन.....""मैडम रिम्पल" ट्विट्टर की एक हस्ती हैं, जो दिल्ली में बसती हैं.. ट्विट्टर पर जब आती हैं, गाने वो गुनगुनाती हैं... नाम बताने में उनका, करना मत त्रुटी... वो हैं कौन....... ""मैडम श्रुति""

"एक बेटी"

बड़ी मन्नतों के बाद किसी के, घर में आती है एक बेटी, कभी मुस्काकर कभी तुतलाकर, रौनक फैलाती है एक बेटी,, फ्रॉक पहन माथे पर बिंदी, छम-छम करके चलती बेटी, पल भर में सब तोड़ खिलौने, घर-घर खेला करती बेटी,, माँ-बाबा दादा-दादी की, सबकी यही चहेती बेटी, रोज़ नए खेलों से अपने, सपने कई दिखाती बेटी,, कब ये वक़्त फिसल जाता है, पढने जाने लगती बेटी, राजकुमार मिलने के सपने, दिल में सजाने लगती बेटी,, पिता की चिंता बढ़ जाती है, घर में एक सायानी बेटी, माँ-बाबा की इज्जत अरमानो को,रखे संजो के रानी बेटी,, पिता करे वादा बेटी से, अपने से अच्छा घर ढूढेंगे, माँ दिलासा देती है कह कर, सौ में एक अनोखा वर ढूढेंगे,, होत दिखाई जब बेटी की, नहीं पसंद आने का डर, पसंद अगर आ भी जाये तो, मांग बड़ी होने का डर,, सभी डरों से मुक्त होते ही, बहू किसी की बन जाती बेटी, बाबुल का घर छोड़ के अब तो, नया घरोंदा बनाती बेटी,, दूजे के घर को अपना करने, लेके विदा चली जाती बेटी, घर सूना है द्वार है सूना, यादो में रह जाती बेटी,, वक़्त के साथ बदलता पहलु, पिता जी नाना बन जाते, वही चहल-पहल फिर आती है, जब बेटी संग आती बेटी..!! By-( Doc Ravi Prata...