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Showing posts with the label इंसानियत

हे मनु के वंशज, तुम कब सुधरोगे?

जो छुपा ले गरीब के गम को, हमने तो वो इंसान नहीं देखे..!! कैसे जाती है बात घर से बाहर, हमने तो दीवार के कान नहीं देखे..!! मिटा दे जो सदियों की दुश्मनी दिलो से, हमने तो वो गीता वो कुरान नहीं देखे..!! अरे अभी भी संभल जाओ बद-दिमागों, दावा करो होश की, क्या सब के सर एक ही आसमान नहीं देखे..!! न पकाओ नफरत की आग पे स्वार्थ की रोटी,इंसानियत रहने दो, इस आग में जलते हुए मकान नहीं देखे..!!