यारी जो समंदर को निभानी नहीं आती… ये तय था कश्तियों पे जवानी नहीं आती.. वो तो हवा ने हमसे दगा कर दिया… क्या हमको एक पतंग उड़ानी नहीं आती.. साँपों के शहर में समझिये उसकी मौत है.. जिसको सुरीली बींन बजानी नहीं आती.. हर छात्र अपनी जबान बंद अगर रखता.. तो लोगों के सामने रामा (my collage) की कहानी नहीं आती.. रिश्तों में भी कुछ ऐसा बदलाव आ गया.. अब याद बुरे वक़्त भी नानी नहीं आती.. ऐ रामा (my collage) वालों दम है तो एक बार आजमा के देख लो.. वैसे भी हमें पीठ दिखानी नहीं आती.. रवि के विचार सुनकर लोग कह उठे… औरों को ऐसी चीज सुनानी नहीं आती…