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खोखली राजनीती का भंवर

दिलकश परदे लगे राज़ के रखवालों के,

हाँ हमसब हैं चोर पूछ लो सरकारों से..

आशाओं के सभी किनारे लगे सरकने,

गए माँगने लोग आसरे मजधारों से..

आये थे नेता जी घर पर प्यार बांटने,

हमे बचा ही लेना दुश्मन..! इन यारों से..

एक तसल्ली के घर में हम ठहरे,, बेघर,

आस लिए बैठे हैं अब तो इन्कारों से..

हम आवारा रूह तड़पकर चले ढूँढने,

वो तन्हाई आज शोरों के बाजारों से..

आज अहिंसा के सायों में जले लोग ये,

आये हैं इन्साफ माँगने तलवारों से..

एक गुलाबी फूल हाथ में लेकर राहुल,

हाल पूछने चले दहशतों के मारों से…

 

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रूठ गयी फिर मोहब्बत

रूठ गयी फिर मोहब्बत मुझसे, मेरी तन्हाई भी खफा हो गयी,, न जाने किस गुनाह ने, बनाया फिर गुनहगार मुझे, मेरी चाहत फिर बे-वफ़ा हो गयी..!! फिर दूर हो गयीं सब चाहतें मुझसे, उनकी बातें भी अब जुदा हो गयीं,, मेरी खताओं कि सज़ा मुझको दी, पर तेरी खताएं तो अदा हो गयीं..!!

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