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Today’s Generation…..

Fans of movies are every where,
we can see them here and there..
they know all the heroes,
in the studies, they may be zero..
for the movies, they are mad,
when they have to study they became sad..
Teacher says,”Writer of the poem is Mr. John.” ,
Student says,”Leave it, see filme ‘Hum aapke hai kaun’”..
Teacher says,”Why are you coming on later”,
Student says,”Sir ‘RAJA’ film is going on in the theatre”..

They know about each and every dialogue and scene,
in the studies, their minds are clean..
In doing the homework, they are very slow,
for seeing movies, they shine with glow..
so future generation will be full of actors,
Films will be made on each and every chapter..

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रूठ गयी फिर मोहब्बत मुझसे, मेरी तन्हाई भी खफा हो गयी,, न जाने किस गुनाह ने, बनाया फिर गुनहगार मुझे, मेरी चाहत फिर बे-वफ़ा हो गयी..!! फिर दूर हो गयीं सब चाहतें मुझसे, उनकी बातें भी अब जुदा हो गयीं,, मेरी खताओं कि सज़ा मुझको दी, पर तेरी खताएं तो अदा हो गयीं..!!

"एक बेटी"

बड़ी मन्नतों के बाद किसी के, घर में आती है एक बेटी, कभी मुस्काकर कभी तुतलाकर, रौनक फैलाती है एक बेटी,, फ्रॉक पहन माथे पर बिंदी, छम-छम करके चलती बेटी, पल भर में सब तोड़ खिलौने, घर-घर खेला करती बेटी,, माँ-बाबा दादा-दादी की, सबकी यही चहेती बेटी, रोज़ नए खेलों से अपने, सपने कई दिखाती बेटी,, कब ये वक़्त फिसल जाता है, पढने जाने लगती बेटी, राजकुमार मिलने के सपने, दिल में सजाने लगती बेटी,, पिता की चिंता बढ़ जाती है, घर में एक सायानी बेटी, माँ-बाबा की इज्जत अरमानो को,रखे संजो के रानी बेटी,, पिता करे वादा बेटी से, अपने से अच्छा घर ढूढेंगे, माँ दिलासा देती है कह कर, सौ में एक अनोखा वर ढूढेंगे,, होत दिखाई जब बेटी की, नहीं पसंद आने का डर, पसंद अगर आ भी जाये तो, मांग बड़ी होने का डर,, सभी डरों से मुक्त होते ही, बहू किसी की बन जाती बेटी, बाबुल का घर छोड़ के अब तो, नया घरोंदा बनाती बेटी,, दूजे के घर को अपना करने, लेके विदा चली जाती बेटी, घर सूना है द्वार है सूना, यादो में रह जाती बेटी,, वक़्त के साथ बदलता पहलु, पिता जी नाना बन जाते, वही चहल-पहल फिर आती है, जब बेटी संग आती बेटी..!! By-( Doc Ravi Prata...

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