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Happy Birthday Adarsh Ji

जन्मदिवस है आज आपका ,करें बधाई को स्वीकार...
हमें तो पार्टी अभी चाहिये , ये तो अपना है अधिकार।।
जुग-जुग जीयें हमारे जीजा, ईश्वर से करते मनुहार...
सदा लुटाते रहें सभी पर, अपना निश्छल लाड दुलार।।

पता किया तो पता चला, के उम्र हुई अब ३5 साल...
किन्तु अभी भी बालक दिल से, देखो इनके रक्तिम गाल।।
जीवों की परवाह ये करते, हरियाली से करते प्रीत...
जन सेवा भी करते रहते, निभा रहे जंगल से प्रीत।।

आदर्शों की बात न पूछो, अपना नाम करें साकार...
पलभर में अपना कर लेते, ऐसा इनका सद्व्यवहार।।
यही कामना हम हैं करते, आप सदा रहिये खुशहाल...
रहे सफलता कदम चूमती, तन मन धन से मालामाल।। By-Doc Ravi

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रूठ गयी फिर मोहब्बत

रूठ गयी फिर मोहब्बत मुझसे, मेरी तन्हाई भी खफा हो गयी,, न जाने किस गुनाह ने, बनाया फिर गुनहगार मुझे, मेरी चाहत फिर बे-वफ़ा हो गयी..!! फिर दूर हो गयीं सब चाहतें मुझसे, उनकी बातें भी अब जुदा हो गयीं,, मेरी खताओं कि सज़ा मुझको दी, पर तेरी खताएं तो अदा हो गयीं..!!

"एक बेटी"

बड़ी मन्नतों के बाद किसी के, घर में आती है एक बेटी, कभी मुस्काकर कभी तुतलाकर, रौनक फैलाती है एक बेटी,, फ्रॉक पहन माथे पर बिंदी, छम-छम करके चलती बेटी, पल भर में सब तोड़ खिलौने, घर-घर खेला करती बेटी,, माँ-बाबा दादा-दादी की, सबकी यही चहेती बेटी, रोज़ नए खेलों से अपने, सपने कई दिखाती बेटी,, कब ये वक़्त फिसल जाता है, पढने जाने लगती बेटी, राजकुमार मिलने के सपने, दिल में सजाने लगती बेटी,, पिता की चिंता बढ़ जाती है, घर में एक सायानी बेटी, माँ-बाबा की इज्जत अरमानो को,रखे संजो के रानी बेटी,, पिता करे वादा बेटी से, अपने से अच्छा घर ढूढेंगे, माँ दिलासा देती है कह कर, सौ में एक अनोखा वर ढूढेंगे,, होत दिखाई जब बेटी की, नहीं पसंद आने का डर, पसंद अगर आ भी जाये तो, मांग बड़ी होने का डर,, सभी डरों से मुक्त होते ही, बहू किसी की बन जाती बेटी, बाबुल का घर छोड़ के अब तो, नया घरोंदा बनाती बेटी,, दूजे के घर को अपना करने, लेके विदा चली जाती बेटी, घर सूना है द्वार है सूना, यादो में रह जाती बेटी,, वक़्त के साथ बदलता पहलु, पिता जी नाना बन जाते, वही चहल-पहल फिर आती है, जब बेटी संग आती बेटी..!! By-( Doc Ravi Prata...

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हाँ इतना Talent है की उसे हम घर में ही दिखाते हैं... देश के काम तो, बेवकूफ ही आते हैं..... किसी भी काम को आसान बनाने के लिए कीमत चुकाते हैं... (रिशवत) काम में महनत को, बेवकूफ ही आजमाते  हैं... चाय की चुश्कियों के साथ Corruption-Corruption चिल्लाते हैं... अनशन पर तो अन्ना जैसे बेवक़ूफ़ ही जाते हैं.... कम Talanted नहीं हैं नेता जी भी, जो संसद में चिल्लाते हैं.... गरीबों के दुखड़े सुनने तो बेवक़ूफ़ ही जाते हैं... भारत माँ के चीरहरण कर्ता को बिरियानी का सेवन कराते हैं.... ऐसे कमीनों को मारने वाले बेवकूफ ही कहलाते हैं.... सच में मेरे देश में बड़ा ही Talent है... -(रवि प्रताप सिंह)