Skip to main content

राजनीति का मारा है, बापू क्या ये देश तुम्हारा है...

हर तरफ मचा है शोर
कदम कदम पे फैला अन्याय घोर,
चारों और घना अँधियारा है
बापु क्या ये देश तुम्हारा है?

लोकतंत्रका बस नाम है
होते भ्रष्टतंत्रसे सब काम है,
झुट फरेब को यहाँ सहारा है
बापु क्या ये देश तुम्हारा है?

सच्चाई का यहाँ होता मुह काला
छिनजाता है गरीबोंके मुह का निवाला,
स्वार्थ में बचा न भाईचारा है  
बापु क्या ये देश तुम्हारा है?

नाम तुम्हारा है लेकर चलते
आचरण कहींभी न तुमसे मिलते,
विचारधारा को आज तुम्हारी ललकारा है
बापु क्या ये देश तुम्हारा है?

सेवक तुम्हारा आज मैदान में खड़ा
तुम्हारे अपनोंसे ही पाला पड़ा,
फिर एक बार तुम्हारी विचारधारा को मारा है
बापु क्या ये देश तुम्हारा है?

Comments

Popular posts from this blog

रूठ गयी फिर मोहब्बत

रूठ गयी फिर मोहब्बत मुझसे, मेरी तन्हाई भी खफा हो गयी,, न जाने किस गुनाह ने, बनाया फिर गुनहगार मुझे, मेरी चाहत फिर बे-वफ़ा हो गयी..!! फिर दूर हो गयीं सब चाहतें मुझसे, उनकी बातें भी अब जुदा हो गयीं,, मेरी खताओं कि सज़ा मुझको दी, पर तेरी खताएं तो अदा हो गयीं..!!

"एक बेटी"

बड़ी मन्नतों के बाद किसी के, घर में आती है एक बेटी, कभी मुस्काकर कभी तुतलाकर, रौनक फैलाती है एक बेटी,, फ्रॉक पहन माथे पर बिंदी, छम-छम करके चलती बेटी, पल भर में सब तोड़ खिलौने, घर-घर खेला करती बेटी,, माँ-बाबा दादा-दादी की, सबकी यही चहेती बेटी, रोज़ नए खेलों से अपने, सपने कई दिखाती बेटी,, कब ये वक़्त फिसल जाता है, पढने जाने लगती बेटी, राजकुमार मिलने के सपने, दिल में सजाने लगती बेटी,, पिता की चिंता बढ़ जाती है, घर में एक सायानी बेटी, माँ-बाबा की इज्जत अरमानो को,रखे संजो के रानी बेटी,, पिता करे वादा बेटी से, अपने से अच्छा घर ढूढेंगे, माँ दिलासा देती है कह कर, सौ में एक अनोखा वर ढूढेंगे,, होत दिखाई जब बेटी की, नहीं पसंद आने का डर, पसंद अगर आ भी जाये तो, मांग बड़ी होने का डर,, सभी डरों से मुक्त होते ही, बहू किसी की बन जाती बेटी, बाबुल का घर छोड़ के अब तो, नया घरोंदा बनाती बेटी,, दूजे के घर को अपना करने, लेके विदा चली जाती बेटी, घर सूना है द्वार है सूना, यादो में रह जाती बेटी,, वक़्त के साथ बदलता पहलु, पिता जी नाना बन जाते, वही चहल-पहल फिर आती है, जब बेटी संग आती बेटी..!! By-( Doc Ravi Prata...

India Has Talent ...

हाँ इतना Talent है की उसे हम घर में ही दिखाते हैं... देश के काम तो, बेवकूफ ही आते हैं..... किसी भी काम को आसान बनाने के लिए कीमत चुकाते हैं... (रिशवत) काम में महनत को, बेवकूफ ही आजमाते  हैं... चाय की चुश्कियों के साथ Corruption-Corruption चिल्लाते हैं... अनशन पर तो अन्ना जैसे बेवक़ूफ़ ही जाते हैं.... कम Talanted नहीं हैं नेता जी भी, जो संसद में चिल्लाते हैं.... गरीबों के दुखड़े सुनने तो बेवक़ूफ़ ही जाते हैं... भारत माँ के चीरहरण कर्ता को बिरियानी का सेवन कराते हैं.... ऐसे कमीनों को मारने वाले बेवकूफ ही कहलाते हैं.... सच में मेरे देश में बड़ा ही Talent है... -(रवि प्रताप सिंह)