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If U Are Willing To Win, U Hv To Fight

हर किसी के साथ जीवन, कभी सख्त होता है,, कभी खराब किस्मत, तो कभी वक़्त होता है,, संघर्ष कर के बढ़ना, मत हारना कभी भी,, सिर्फ कायरों का सूरज, गर्तों में ज़ब्त होता है..!!

प्यार और अंगार में कोई फर्क नहीं...

किसी प्यार करने वाले की, बात मत पूछो,, चाहत की लौ में खुद को, पतंगे की तरह जलाते हैं..!! मत पूछो कितना सुलग रहा, मेरे सीने में ग़म,, कभी ये शमा बुझाते हैं, तो कभी वो शमा बुझाते हैं..!! मेरे हर आंसू में होती है, नीलम सी चमक,, पर अफ़सोस...ये दुनिया वाले इसे न देख पाते है..!!

लड़कियों की परिभाषा- "एक हास्य व्यंग"

दुनियां को अजब रंग, दिखाती हैं लड़कियाँ मर्दों को उंगली पर, नचाती हैं लड़कियाँ कपड़ों के बदलते फैशन से, लगती हैं जैसे दर्जियों के कारोबार, चलाती हैं लड़कियाँ मेकअप बगैर कहीं भी, दिखती नहीं हैं अब तो चेहरे पे एक चेहरा, चढ़ाती हैं लड़कियाँ बुढियां भी कम नहीं हैं, करती हैं खूब तमाशा, बाल कटा-कटा कर, कहलाती हैं लड़कियाँ दुनिया के हर टॉपिक पे, करवालो इनसे बातें बोलने में कब मात, खाती हैं लड़कियाँ देख-देख के एक दूसरे को, होती है इनको जैलस तारीफ किसी और की, कहाँ कर पाती हैं लड़कियाँ एक्टिंग करने में कोई, सानी नहीं है इनका एक्टरों को भी पीछे, छोड़ जाती हैं लड़कियाँ छोटी-छोटी बातों पर, ये हो कर नाराज़ मगरमच्छ के आंसू, बहाती हैं लड़कियाँ तमन्ना यही रहती है, के हो जाए शादी रोने का मात्र ड्रामा, रचाती हैं लड़कियाँ दिन-रात ताने देकर, सर पे करें ये तांडव मर्दों को भी गंजा, बनाती हैं लड़कियाँ रिश्तों की दूरियों को, किलोमीटरों बढ़ाएं ये आग कुछ ऐसी, भड़काती हैं लड़कियाँ सोचकर लिख "रवि", न लेना इनसे पंगा अच्छे अच्छों को नाको-चने, चाबवाती हैं लड़कियाँ...!! BY- ( Doc Ravi Pratap Sing...

आओ कुछ देर हँसते हैं

आओ कुछ देर हँसते हैं,मोहब्बत पर इनायत पर… ये बे-बुनियाद बातें हैं, सभी रिश्ते सभी नाते… कहीं कोई नहीं मरता, किसी के वास्ते जाना, ये सब है फेर लफ्ज़ों का, है सारा खेल जस्बों का.. नहीं महबूब कोई भी,सभी जुमले से कसते हैं… उसी को याद करते हैं, आओ कुछ देर हँसते हैं.. सांस लेना भी बिन जिसके, हमें इक जुर्म लगता था, हुस्न उसका स्वर्ण जैसा, बला का तेज़ लगता था… जो साया बन के रहता था,जुदा अब उस के रस्ते हैं.. आओ कुछ देर हस्ते हैं, आओ कुछ देर हस्ते हैं...!!

"मेरी व्यथा-कथा"

दो दिन पहले की बात बताऊँ, सबको अपनी व्यथा सुनाऊं,, हम बाल कटाने गए दुकान, भरपूर दिया नई ने सम्मान,, बोला-"बैठो भाई जान, किस तरह होगा कटिंग का काम,," हमने बोला-"करो उस-तरह, पहले कटवाए थे जिस तरह,," वो ससुरा कुछ अनपढ़ ठहरा, था शायद एक कान से बहरा,, उस-तरह को समझ उस्तरा, सर पे मेरे फेर दिया उस्तरा,, अब गंजे होकर लौटे हैं, और चादर तान के सोते हैं,, तब तक शकल किसे दिखलायें, जब तक बाल ये उग न जाएँ..!! By-( Doc Ravi Pratap Singh )

"एक बेटी"

बड़ी मन्नतों के बाद किसी के, घर में आती है एक बेटी, कभी मुस्काकर कभी तुतलाकर, रौनक फैलाती है एक बेटी,, फ्रॉक पहन माथे पर बिंदी, छम-छम करके चलती बेटी, पल भर में सब तोड़ खिलौने, घर-घर खेला करती बेटी,, माँ-बाबा दादा-दादी की, सबकी यही चहेती बेटी, रोज़ नए खेलों से अपने, सपने कई दिखाती बेटी,, कब ये वक़्त फिसल जाता है, पढने जाने लगती बेटी, राजकुमार मिलने के सपने, दिल में सजाने लगती बेटी,, पिता की चिंता बढ़ जाती है, घर में एक सायानी बेटी, माँ-बाबा की इज्जत अरमानो को,रखे संजो के रानी बेटी,, पिता करे वादा बेटी से, अपने से अच्छा घर ढूढेंगे, माँ दिलासा देती है कह कर, सौ में एक अनोखा वर ढूढेंगे,, होत दिखाई जब बेटी की, नहीं पसंद आने का डर, पसंद अगर आ भी जाये तो, मांग बड़ी होने का डर,, सभी डरों से मुक्त होते ही, बहू किसी की बन जाती बेटी, बाबुल का घर छोड़ के अब तो, नया घरोंदा बनाती बेटी,, दूजे के घर को अपना करने, लेके विदा चली जाती बेटी, घर सूना है द्वार है सूना, यादो में रह जाती बेटी,, वक़्त के साथ बदलता पहलु, पिता जी नाना बन जाते, वही चहल-पहल फिर आती है, जब बेटी संग आती बेटी..!! By-( Doc Ravi Prata...

आँसू रिश्ते और ख्वाब....

प्रिय मित्रों,  आँसू रिश्ते और ख्वाब,, टूटते हैं लेकिन छूटते नहीं..!! वो जो दर्द दफ़न किया था, दिल की गहरी खाइयों में,, आज फिर दिखने लगा है, मेरी ही परछाइयों में..!! एक सच जो न पिया जाता है, न उगला जाता है,, लाख रोकने के बावजूद, गले तक चला आ जाता है..!! आज फिर से ये लावा बनकर उबल रहा है,, सुनामी की लहरों की मानिंद मचल रहा है..!! फिर वही वीरान रातें आ खड़ी हैं उजाले की आस में,, फिर वैसे ही भटक रहा हूँ एक नींद की तलाश में..!! फिर ये कमीना दिल दोगला हो गया है,, प्यार बाँटते-बाँटते शायद खोखला हो गया है..!! कभी तो मीठे आश्वासनों से मुझे तसल्ली देता है,, और कभी-कभी कमबख्त सब सच उगल देता है...!! माँ, आज फिर तेरे प्यार की दरकार है,, तुझसे दो बूँद भी मिले तो स्वीकार है..!! ये तेरा प्रेम ही तो है.. जिसने हर हालात में जीना सिखा दिया, घाव कैसा भी हो, उसे सीना सिखा दिया..!! ये तेरा प्रेम ही तो है.. जिसने मेरी रूह को मुझसे मिला दिया, मेरी रूकती हुयी साँसों को फिर से चला दिया..!! जानता हूँ मजबूरी तेरी, पर यूँ न मुझपर कहर बरसा,, मुझसे चाहे बात न कर, पर प्यार के लिए और मत तरसा...!! ...